केन-बेतवा जल परियोजनाः यूपी और एमपी में पानी बंटवारे को लेकर फंसा नया पेच

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Updated Wed, 28 Oct 2020 02:55 AM IST
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केन-बेतवा
केन-बेतवा - फोटो : SELF

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सार

  • मानसूनी सीजन में ही पानी देना चाहता है मध्य प्रदेश, लंबे अरसे से लटकी केन-बेतवा परियोजना
  • कल नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक में होगी चर्चा

विस्तार

महत्वाकांक्षी केन-बेतवा जल परियोजना में पानी बंटवारे को लेकर इन दिनों नया पेच फंसा हुआ है। पानी की मात्रा तय हो गई, लेकिन दोनों राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) और मध्य प्रदेश (एमपी) के बीच पानी लेने की समय अवधि को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। मध्य प्रदेश जहां मानसूनी सीजन में अधिकांश पानी देने पर जोर दे रहा। वहीं, यूपी इसके लिए तैयार नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है नई दिल्ली में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस पर बीच की राह निकालने की कोशिश होगी। 
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बुंदेलखंड, खासतौर से झांसी के लिए यह जल परियोजना काफी अहम है। इसके जरिए बुंदेलखंड के करीब 13695 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसमें अधिकांश हिस्सा झांसी का है। वर्ष 2005 में एमओयू में हस्ताक्षर होने के बाद भी जल बंटवारे को लेकर मप्र-उप्र के बीच विवाद चल रहा है। लेकिन, सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला तकरीबन सुलझ चुका। दोनों ही राज्य 1700-1700 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी पर राजी हो गए। लेकिन, अब नया पेच फंस गया। 
मप्र शासन बारिश के दिनों में ही पानी आगे छोड़ने को राजी है। जबकि उप्र उसकी यह शर्त मानने को राजी नहीं। सिंचाई अफसरों का कहना है बारिश में यूपी के पास भी पानी भरपूर रहता है, ऐसे में यह शर्त मानने पर नुकसान होगा। इसी बात को लेकर पिछले काफी समय से दोनों प्रदेशों के बीच गतिरोध चल रहा है। पिछले दिनों दोनों प्रदेशों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई लेकिन, निर्णय नहीं हो सका। अब बृहस्पतिवार को होने वाली सालाना उच्च स्तरीय बैठक में इस पर चर्चा होने की उम्मीद है। स्थानीय सिंचाई अफसर बैठक की तैयारियों में जुटे रहे।     
 
बरुआसागर में आकर मिलेगी मुख्य नहर
केन-बेतवा जलपरियोजना झांसी के लिहाज से काफी अहम परियोजना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में देश की 37 नदियों को आपस में जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। उसमें इस परियोजना को सबसे पहले आरंभ करने निर्णय लिया गया था। करीब छह हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य बांध पन्ना के टाइगर रिजर्व के डोंदन गांव पर बनाया जाना है। इसके जरिए चार बांध बनाए जाने हैं। यह सभी बांध मप्र में ही बनाए जाने हैं। 218 किमी लंबी मुख्य नहर झांसी के बरुआसागर में लाकर मिलाने का प्रस्ताव है। इससे झांसी के सूखा ग्रस्त इलाकों तक भी आसानी से पानी पहुंच सकता है। लेकिन, पिछले 15 साल से उप्र एवं मप्र के बीच पानी को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
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