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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

डीडीसी चुनावः आज 43 सीटों पर वोटिंग, कश्मीर के सभी मतदान केंद्र संवेदनशील

जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद के दूसरे चरण के लिए मंगलवार को 43 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में 25 सीटें कश्मीर और 18 जम्मू में हैं। 321 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 196 कश्मीर से और 125 जम्मू में हैं। कश्मीर संभाग की सभी मतदान केंद्र संवेदनशील हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। राज्य के चुनाव आयुक्त केके शर्मा ने सोमवार को यहां मीडिया से बात करते हुए सभी मतदाताओं से अपील की है कि वह मास्क लगाकर ही वोट डालने के लिए आएं। सभी मतदान केंद्रों पर दस-दस लीटर सैनिटाइजर का इंतजाम है। 

शर्मा ने दोहराया कि किसी भी उम्मीदवार को चुनवा प्रचार से मना नहीं किया गया है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर का पूर्व मुख्य मंत्री हो के नाते घर से बाहर निकलते समय सुरक्षा प्रोटोकाल का पालन करने की जरूरत है। सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है आशा है कि लोग बिना किसी डर के बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए घर से बाहर निकलेंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप पर कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं और उन्हें आईजी कश्मीर को भेज दिया गया था, जिन्होंने संबंधित एसएसपी के साथ इस मुद्दे को उठाया है। मैं स्पष्ट करता हूं कि किसी भी उम्मीदवार को चुनाव प्रचार करने से नहीं रोका गया है। कभी-कभी सुरक्षा से जुड़े कुछ मामले होते हैं। हमारे लिए मानव जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। बाद के चरण के उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वह चुनाव प्रचार के लिए जाने से पहले पुलिस को सूचित कर दें ताकि उनकी सुरक्षा के इंतजाम किए जा सकें। उन्होंने कहा कि कुछ उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया है और उन्हें जल्द ही उचित सुरक्षा घेरे के तहत अपने-अपने घरों में जाने की अनुमति दी जाएगी।

-प्रोटोकाल के साथ महबूबा कर सकती हैं प्रचार
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के आरोप कि उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। इसके बारे में राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि महबूबा मुफ्ती पूर्व मुख्यमत्री हैं। उनका एक तयशुदा प्रोटोकॉल है। जिसे महबूबा के घर से निकलते समय पुलिस को पालन करा होता है। जहां तक उनकी शुक्रवार की यात्रा की बात है तो  वह चुनाव प्रचार के लिए नहीं जा रही थीं। वह उचित प्रोटोकाल के साथ अपनी पार्टी के उम्मीदवार का प्रचार करने को स्वतंत्र हैं।
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कोरोना महामारी के साथ एड्स की भी चुनौती, इस साल अब तक 81 लोगों की हो चुकी मौत

जम्मू-कश्मीर में कोविड महामारी के साथ एचआईवी और एड्स भी चुनौती बना हुआ है। प्रदेश में इस साल अक्तूबर तक एड्स 81 लोगों की जिंदगी लील चुका है और 252 नए एचआईवी मामले रिपोर्ट हुए हैं। नए मामलों में जिला कठुआ सबसे ज्यादा प्रभावित है, जबकि जम्मू संभाग के सांबा, जम्मू, उधमपुर और कश्मीर में श्रीनगर भी एचआईवी/एड्स से प्रभावित रहा है। एचआईवी फैलने का मुख्य कारण रोग ग्रस्त चालक, विस्थापित श्रमिक, सेक्स वर्कर और सुरक्षाकर्मी बन रहे हैं।  

जम्मू-कश्मीर में 1999 में एड्स कंट्रोल सोसायटी के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक 1142 लोगों की एड्स से मौत हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर एड्स कंट्रोल सोसायटी के केंद्रों पर अब तक 5254 एचआईवी मरीज पंजीकृत हुए हैं। इनमें 2821 पीड़ितों का एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी केंद्रों पर इलाज चल रहा है। पंजीकृत कुल पीड़ितों में 696 ऐसे हैं जो इलाज बीच में छोड़कर चले गए या एआरटी केंद्रों पर नहीं पहुंचे हैं। इस साल कोविड महामारी के चलते एचआईवी पीड़ितों को भी परेशानी झेलनी पड़ी है। कई महीनों तक लॉकडाउन के कारण पीड़ितों को उचित इलाज से वंचित रहना पड़ा है। खासतौर पर जिला स्तर से जम्मू आने वाले मरीज अधिक प्रभावित हुए हैं। हालांकि मौजूदा में पीड़ितों को इलाज दिया जा रहा है। 

जीएमसी जम्मू में दो हजार से अधिक पीड़ितों का चल रहा इलाज 
जीएमसी जम्मू के एआरटी केंद्र पर 2394 पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है। इस केंद्र में 4559 मरीज अब तक पंजीकृत हुए हैं। जिसमें 2651 पुरुष, 1617 महिलाएं, 11 ट्रांसजेंडर, बच्चों में (15 साल तक) 162 लड़के और 118 लड़कियां हैं। जम्मू संभाग में अब तक 1019 लोगों की एड्स से मौत हो चुकी है। इसमें 702 पुरुष और 268 महिलाएं, 2 ट्रांसजेंडर और 47 बच्चे हैं। स्किम्स श्रीनगर के एआरटी केंद्र पर 316 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां अब तक 580 पीड़ित पंजीकृत हुए हैं और 123 लोगों की मौत हो चुकी है। 

जीएमसी कठुआ में भी एआरटी केंद्र सक्रिय  
नए मेडिकल कॉलेजों में जीएमसी कठुआ में एआरटी केंद्र स्थापित करके एचआईवी/एड्स पीड़ितों को इलाज दिया जा रहा है। जीएमसी में वर्तमान में 111 पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है। जिला स्तर पर नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने से अब जिला कठुआ के लोगों को इलाज के लिए जम्मू नहीं आना पड़ता है। इस केंद्र में अब तक किसी पीड़ित की मौत दर्ज नहीं हुई है।     

एड्स के लिए दो मुख्य वायरस जिम्मेदार 
एड्स का मुख्य कारण शरीर में एचआईवी वायरस का फैलना है। ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंसी वायरस (एचआईवी)  शरीर में तेजी से फैलकर इम्यून सिस्टम को खत्म कर देता है। एड्स के लिए एचआईवी 1 और एचआईवी 2 वायरस जिम्मेदार है।
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पाकिस्तान ने रिहायशी इलाकों में रात भर दागे गोले, हीरानगर सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन

हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन कर शनिवार रात भर गोलाबारी की। सैन्य चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। बीएसएफ के जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। गोलाबारी में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।

जानकारी के अनुसार शनिवार रात दस बजे पाकिस्तानी सेना ने ठाकर पुरा, करोल पंगा पोस्ट से गोलाबारी शुरू की। इस दौरान छोटे और बड़े हथियारों का इस्तेमाल किया गया। बीएसएफ की पानसर और करोल कृष्णा पोस्ट व उसके साथ लगते रिहायशी इलाकों में गोले दागे। सीमा से सटे खेतों में भी कई गोले गिरे। गोलाबारी रविवार सुबह चार बजे तक जारी रही। 

गौर हो कि सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध के कार्य को बाधित करने के लिए पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा है। कभी यहां काम कर रही मशीनों को निशाना बनाता है तो कभी बीएसएफ की चौकियों और रिहायशी इलाकों को। उसकी इस नापाक हरकत के बावजूद भी बांध बनाने का काम निरंतर जारी है।
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जम्मू-कश्मीर: सीमावर्ती अरनिया में फिर दिखा पाकिस्तानी ड्रोन, सतर्क जवानों को देख लौटा

जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शनिवार रात को एक बार फिर से पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया। जवानों की सतर्कता के चलते वह वापस लौट गया। बीएसएफ के जवान अलर्ट पर हैं। 

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने रविवार रात जम्मू-कश्मीर में आरएस पुरा सेक्टर के अरनिया इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर ड्रोन देखा।
अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन चेतावनी के बाद वापस पाकिस्तान की ओर चला गया।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन के बीच 21 नवंबर को नियंत्रण रेखा (नियंत्रण रेखा) के साथ मेंधर सेक्टर में ड्रोन की गति देखी गई। 20 नवंबर को दो ड्रोन पाकिस्तान की दिशा से देखे गए और सांबा सेक्टर में आईबी को पार कर गए। 

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन जारी रखते हुए शुक्रवार रात करीब छह घंटे गोलाबारी की थी। इस दौरान बीएसएफ की चौकियों और इनके साथ लगते रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। 


सुरक्षा बांध का काम शुरू होते ही फायरिंग
बताया जाता है कि सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध का काम जैसे ही शुरू हुआ, पाकिस्तान के 25 चिनाब रेंजर्स ने भीके चक, करोल पंगा, चक सामां पोस्ट से रात दस बजे गोलाबारी शुरू कर दी, जो अगले दिन तड़के चार बजे जारी रही। 

रिहायशी इलाकों को बनाया निशाना
इस दौरान बीएसएफ की पानसर, करोल कृष्णा, गुरनाम और उसके साथ लगते रिहायशी इलाकों में गोले दागे। सीमा सुरक्षा बल ने भी जवाबी कार्रवाई की। 
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जम्मू-कश्मीर: कारगिल जा रही एसयूवी हिमस्खलन में फंसी, सुरक्षाबलों ने छह को बचाया

ड्रोन
पांच दिन बाद खुले श्रीनगर-लेह हाईवे पर शनिवार को सोनमर्ग से कारगिल जा रही एक एसयूवी (जेके07/4499) हिमस्खलन की चपेट में आ गई। घटना की जानकारी मिलते ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 122 आरसीसी के जवान मौके पर पहुंच गए और रेस्क्यू शुरू कर दिया। 

इसी दौरान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पुलिस भी मौके पर पहुंच गईं। कुछ ही घंटे में गाड़ी में फंसे छह लोगों को निकाल लिया गया। जबकि देर रात को गाड़ी को निकाला गया। 

बताया जाता है कि  जिस समय यह हादसा हुआ तब इस गाड़ी में 6 लोग सवार थे। जवानों द्वारा सभी 6 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ी को निकाला गया।

बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि सभी लोगों को बीआरओ कैम्प में खाने और रहने की सुविधा प्रदान की गई है। 
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श्रीनगर में सेना पर हमले की वीडियो हुआ वायरल, नजदीक से चलाई थी गोली, आतंकी के बॉडी कैम से किया रिकॉर्ड

श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके खुशीपोरा में 26 नवंबर को सेना पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी कश्मीर घाटी में सामने आए नए आतंकी संगठन पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) ने ली है। साथ ही सेना के साथ काम करने वाले स्थानीय लोगों को भी धमकी दी गई है। 

आतंकी हमले का एक वीडियो शनिवार को वायरल हुआ है। इस हमले में सेना के दो जवान शहीद हुए थे। वायरल एक मिनट 52 सेकंड के वीडियो को आतंकी के बॉडी कैम से शूट किया गया है जिसमें यह पता चलता है कि आतंकियों ने एक दम नजदीक से जवानों पर गोलियां चलाई। 

वीडियो में एक हमलावर फायरिंग करता भी दिख रहा है और दूसरे आतंकी को कश्मीरी भाषा में कवर फायर देने के लिए कह रहा है। इससे यह पता चल रहा है कि हमलावर कश्मीरी थे। दोनों जवानों को आतंकियों ने एकदम नजदीक से गोली मारी और फरार हो गए।

वीडियो में जो हथियार दिखाए गए हैं वह अक्सर जैश आतंकियों द्वारा प्रयोग में लाए जाते हैं। हमले वाले दिन आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने भी हमले के पीछे जैश या लश्कर का हाथ होने की आशंका जताई थी। बता दें कि इससे पहले बारामुला के क्रीरी में सीआरपीएफ क्र्तीरी में हमले का भी वीडियो पीएएफएफ ने जारी किया था।
 
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आतंक और अलगाववाद को जनता का करारा जवाब, नए जम्मू-कश्मीर के पहले चुनाव में भारी मतदान

अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए जम्मू-कश्मीर के पहले चुनाव में अवाम ने आतंकवाद और अलगाववाद को करारा जवाब दिया है। कड़ी सुरक्षा और ठंड के बीच जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के पहले चरण में 43 सीटों पर 51.67 फीसदी मतदान हुआ। कश्मीर में 40.65 और जम्मू संभाग में 64 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। रियासी जिले में सर्वाधिक 74.62, जबकि पुलवामा में सबसे कम 6.70 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया।

सुबह सात से दोपहर दो बजे तक चले मतदान में लोगों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कश्मीर में कुलगाम जिले के एक मतदान केंद्र में पथराव को छोड़ जम्हूरियत के इस पर्व में कहीं कोई खलल नहीं रहा। पाकिस्तान की साजिश और अलगाववादियों की चुनाव बहिष्कार की अपील को दरकिनार कर लोगों ने शांतिपूर्ण माहौल में मतदान किया। आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी लोग बेखौफ होकर मतदान के लिए घरों से निकले।

ठंड के बावजूद गांव की सरकार को चुनने के लिए लोग सुबह ही मतदान केंद्रों में पहुंचना शुरू हो गए। बूथों पर महिलाओं की भी लंबी कतारें देखी गईं। शनिवार को पहले चरण में जम्मू संभाग में डीडीसी की 18 और कश्मीर में 25 सीटों के अलावा पंचों-सरपंचों के रिक्त पदों पर चुनाव हुआ। कोरोना महामारी के बीच पहले चरण में सात लाख तीन हजार मतदाताओं में से 362766 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

प्रदेश में 193375 पुरुषों और 169391 महिला मतदाताओं ने वोट डालकर लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई। प्रत्येक मतदान केंद्र में सैनिटाइजर्स, फेस मास्क और नान कांटैक्ट थर्मामीटर की व्यवस्था की गई थी। राज्य चुनाव आयुक्त केके शर्मा ने कहा कि कोरोना काल और प्रदेश के कई जिलों में बर्फबारी व कड़ाके की ठंड के बावजूद मतदाताओं का बड़ी संख्या में निकलना एक अच्छा संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य सात चरणों में लोकतंत्र के इस पर्व में और ज्यादा लोग हिस्सा लेंगे।

पहली बार पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने डाले वोट
अनुच्छेद 370 के हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में हो रहे चुनाव में सात दशक में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अभी तक उन्हें केवल लोकसभा चुनाव में भी वोट डालने का अधिकार था। 370 के हटने के बाद वह प्रदेश के हर चुनाव में वोट डाल पाएंगे। 

रियासी में सबसे अधिक और पुलवामा में सबसे कम मतदान

जिला                मतदान
रियासी             74.62
राजोरी              70.52
पुंछ                  68.69
सांबा                 68.61
डोडा                 64.49
रामबन             64.21
कठुआ           62.82
जम्मू              61.49
उधमपुर          57.13
बडगाम          56.96    
किश्तवाड़      55.16
कुपवाड़ा        50.74
गांदरबल        48.62
बांदीपोरा        43.57
अनंतनाग        43.32
शोपियां            42.58
कुलगाम             34.35
श्रीनगर              33.76    
बारामुला            32.51
पुलवामा              06.70
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कुल                    51.76
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जम्मू कश्मीर : पाकिस्तान से आए शरणार्थी मतदान की कतार में खडे होकर बोले, 70 साल बाद हुआ इंसाफ 

जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव एवं पंचायत उपचुनाव के लिए शनिवार को मतदान हुआ और इस दौरान मतदान केद्रों पर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। अनुच्छेद 370 के समाप्त किए जाने के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी, वाल्मिकी और गुरखा आदि समुदाए के लोग अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय चुनाव में वोट डाले। इसके साथ ही वह जमीन खरीदने एवं नौकरियों के लिए आवेदन करने के पात्र भी बन गए हैं। इतना ही नहीं वो चुनाव भी लड़ सकते है।

पांच अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और उसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। इसके बाद सरकार ने कई कानून लागू किए जिनमें जमीन और नागरिकता से जुड़े कानून भी शामिल हैं। जम्मू के बाहरी इलाके के अखनूर प्रखंड के कोट घारी में एक मतदान के दौरान केंद्र के बाहर कतार में खड़ी पश्चिम पाकिस्तान शरणार्थी समुदाय की युवती सुजाती भारती बोली 'हमने समानता, न्याय एवं आजादी जैसे शब्द सुने हैं और आज हम इन शब्दों के असली मायने महसूस कर रहे हैं।’

उसने विशेष दर्जा हटाने के केंद्र के फैसले के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि उसके समुदाय के लोग 70 साल के बाद स्थानीय चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारती ने कहा कि वह स्थायी निवासी के रूप में कतार में मुक्त महसूस कर रही हैं। आखिरकार सात दशक के लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला। संसदीय चुनाव छोड़कर ये शरणार्थी पिछले साल तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा, पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान से वंचित थे। 

एक अन्य मतदाता बिशन दास (67) ने कहा कि वह अतीत को नहीं याद करना चाहते हैं लेकिन उन्हें उज्ज्वल भविष्य की आस है जिसमें उनके पोते, नाती-नातिनें बाहर जाएं और बिना किसी परेशानी के नौकरी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, 'हम सशक्त हो गए। पहले कोई भी वोट मांगने के लिए हमारे यहां नहीं आया करता था। आज हर उम्मीदवार तीन बार दरवाजे पर आया।' विभाजन के बाद पाकिस्तान से आये पश्चिम पाकिस्तान के ज्यादातर शरणार्थी आरएसपुरा, अखनूर, सांबा, हीरानगर और जम्मू में बस गये। यहां डेढ़ लाख से अधिक शरणार्थी हैं।

आठ चरणों में हो रहे डीडीसी चुनाव के पहले चरण में 43 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा जिनमें 25 कश्मीर में और 18 जम्मू में हैं। सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जो दो बजे समाप्त हो गया। कुल 1,475 उम्मीदवारों में 296 पहले चरण में चुनाव मैदान में हैं। उनमें 172 कश्मीर घाटी और 124 जम्मू क्षेत्र में हैं। जम्मू कश्मीर में 12,153 पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में भी चुनाव हुआ। इनमें 11,814 कश्मीर घाटी में और 339 जम्मू में हैं। पहले चरण में सात लाख मतदाताओं के लिए 1644 मतदान केंद्र तैयार किए गए थे। इनमें कश्मीर में 3.72 लाख और जम्मू में 3.28 लाख मतदाता हैं।
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