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ये चार राशि के लोग हो जाएं सावधान, कष्टकारी रहेगा शनिवार
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गर्व : चंडीगढ़ की शूटर गौरी श्योराण बनीं ग्लोबल एंबेसडर, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मिला सम्मान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर चंडीगढ़ की शूटर गौरी श्योराण को इंटरनेशनल वुमन क्लब ने 2021 का ग्लोबल एंबेसडर नियुक्त किया है। एक ऑनलाइन कार्यक्रम में चेक...

18 अप्रैल 2021

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Digital Edition

लीक से हटता किसान आंदोलन: पटरी पर लाना होगी चुनौती, तीन घटनाओं और आंदोलनकारियों पर संगीन आरोप से बिगड़ा खेल

किसान आंदोलन लीक से भटकने लगा है। ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहे कुछ आंदोलनकारियों पर संगीन अपराधों के आरोप लगे हैं। ताजा मामला बहादुरगढ़ का है। जहां एक ग्रामीण को किसान आंदोलन में जिंदा जला दिया गया। आरोप दो आंदोलनकारियों पर है। पुलिस जांच कर रही है लेकिन छवि पर आंच तो आ गई है।

इससे पहले बहादुरगढ़ के ही टीकरी बार्डर पर चल रहे आंदोलन में बंगाली युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक आंदोलनकारी पकड़ा गया था। हालांकि बड़े किसान नेता इन लोगों को आंदोलनकारी नहीं मान रहे लेकिन घटनास्थल किसान आंदोलन है तो इसका फैसला करना कठिन है। वहीं अगर ये लोग आंदोलनकारी नहीं हैं तो क्या से मान लिया जाए कि आंदोलन में असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। खुद गृहमंत्री अनिल विज ये बात कह चुके हैं।


किसान आंदोलन से शुरुआत के दो महीने तक जहां कोई विवाद नहीं जुड़ा था, वहीं अब साढ़े चार महीने में आंदोलन से लगातार विवाद जुड़ रहे हैं, जिससे सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि सरकार व किसानों में बातचीत का रास्ता पूरी तरह से बंद होता जा रहा है। अब ग्रामीण भी आंदोलनकारियों का विरोध करने लगे हैं। सोनीपत में ग्रामीणों ने महापंचायत कर रास्ते बंद करने का विरोध किया है। ऐसे में किसान नेताओं पर किसान आंदोलन को सफल बनाने के साथ ही इसे विवादों से दूर रखने की दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। 
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किसान आंदोलन किसान आंदोलन

विदाई: पंचतत्व में विलीन हुए 'उड़न सिख', पत्नी की तस्वीर सीने से लगा दुनिया को कहा अलविदा 

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे उड़न सिख मिल्खा सिंह शनिवार को अपनी अनंत यात्रा पर रवाना हो गए। जीवन में हर कठिनाई को पार कर मिल्खा सिंह ने वो पहचान बनाई कि दुनिया उनकी मुरीद बन गई। कोरोना जैसी नामुराद बीमारी ने उनका जीवन बेशक छीन लिया लेकिन वे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। चंडीगढ़ में शनिवार शाम जब उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई तो पूरा चंडीगढ़ अपने हीरो को सलामी देने उमड़ पड़ा। 

शाम लगभग साढ़े पांच बजे पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह की फोटो को सीने से लगाकर मिल्खा सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए। इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीके सिंह बदनौर सेक्टर 25 के श्मशान घाट पहुंचे और  परिवार को सांत्वना दी। 


मिल्खा सिंह के अंतिम दर्शन करने पहुंचे पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह सेक्टर-8 स्थित मिल्खा सिंह के आवास पर करीब 5 मिनट बैठे। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने एक दिन के राजकीय शोक और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी पटियाला में मिल्खा सिंह के नाम पर एक चेयर स्थापित करने का एलान किया। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता महान धावक मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके निवास स्थल पर पहुंचे थे।

शाम चार बजे मिल्खा सिंह के पार्थिव शरीर को फूलों से सजी गाड़ी में रखा गया था। इससे पहले पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल अपने परिवार के साथ मिल्खा सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह पूरे पंजाब और देश के लिए दुख की घड़ी है। बादल ने कहा कि वह यही कामना करते हैं कि देश की हर मां मिल्खा सिंह जैसे पुत्र को जन्म दे। 

आखिरी इंटरव्यू में कहा था, मैं वापस आऊंगा
बीमारी के दौरान ही दिए गए अपने आखिरी इंटरव्यू में उन्होंने वादा किया था वह तीन-चार दिन में ठीक होकर वापस आ जाएंगे। कोरोना संक्रमण का पता चलने के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह ने कहा था कि वह जल्दी ठीक हो जाएंगे और उन्हें यकीन था कि अपनी स्वस्थ जीवन शैली और नियमित व्यायाम के दम पर वह वायरस को हरा देंगे।
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नमन: राजकीय सम्मान के साथ होगा मिल्खा सिंह का अंतिम संस्कार, पंजाब में एक दिन का राजकीय शोक घोषित

करीब एक महीने तक कोरोना से जूझने के बाद शुक्रवार देर रात पूर्व ओलंपियन पद्मश्री मिल्खा सिंह (91) का पीजीआई चंडीगढ़ में निधन हो गया था। फ्लाइंग सिख के नाम से दुनिया भर मे मशहूर मिल्खा सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए उनके सेक्टर-8 स्थित आवास पर रखा गया है। पंजाब सरकार की तरफ से स्वर्गीय मिल्खा सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। मिल्खा सिंह की याद में पंजाब में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। दोपहर करीब तीन बजे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उड़न सिख को श्रद्धांजलि देने उनके घर पहुंचे।

सेक्टर-25 के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शाम करीब पांच बजे सेक्टर 8 स्थित निवास से मिल्खा सिंह की अंतिम यात्रा शुरू होगी। शनिवार को कई दिग्गजों ने मिल्खा सिंह के घर पहुंचकर उनके निधन पर शोक जताया और परिवार को सांत्वना दी।



पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल अपने परिवार के साथ मिल्खा सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह पूरे पंजाब और देश के लिए दुख की घड़ी है। बादल ने कहा कि वह यही कामना करते हैं कि देश की हर मां मिल्खा सिंह जैसे पुत्र को जन्म दे। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने मिल्खा सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि कोरोना वायरस से देश ने एक और महान इंसान को खो दिया है।



बदनौर ने अपने शोक संदेश में कहा है कि मिल्खा सिंह द्वारा खेल क्षेत्र में दिए गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। चंडीगढ़ के डीसी मनदीप सिंह बराड़ मिल्खा सिंह के घर पहुंचे।शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के प्रधान सुखदेव सिंह ढींढसा मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके निवास स्थल पर पहुंचे। 
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साथ जिएंगे साथ मरेंगे: कोरोना से योद्धा की तरह लड़े मिल्खा सिंह... पत्नी के जुदा होने के गम में हारे

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह कोरोना से जंग बेशक हार गए लेकिन उससे लड़ाई उन्होंने एक योद्धा की तरह लड़ी। हालांकि पांच दिन पहले पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह की मौत के बाद से वे टूटने लगे थे। पीजीआई में उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, पत्नी से अलग होने का गम उन्हें बहुत ज्यादा सता रहा था। 

पीजीआई में भर्ती होने के बाद हर पल उन्हें निर्मल मिल्खा सिंह की चिंता सताती रहती थी। वह इलाज करने वाले डॉक्टरों से बार बार उनका हाल पूछा करते थे। जब कभी उन्हें आराम मिलता तो वह डॉक्टरों को अपने पुराने किस्से भी सुनाया करते थे। उनका इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि दो दिनों तक जब उनकी पत्नी से बात नहीं हो पाई तो उन्होंने कहा कि लगता है कि उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई है। देखना हम दोनों साथ जिए हैं, अब साथ ही मरेंगे।


पीजीआई में भर्ती होने के बाद मिल्खा सिंह की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा था। पांच दिनों में 70 प्रतिशत ऑक्सीजन लेवल मेंटेन होकर 10 फीसदी पर आ चुका था। 16 जून को उनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव भी आ गई थी। इसके बाद उन्हें एडवांस कार्डियक सेंटर में भर्ती किया गया था। वहां उनका इलाज कर रहे डॉक्टर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन पत्नी से अलग होने का गम उन्हें अंदर ही अंदर कमजोर कर रहा था। जिसके कारण उन पर इलाज का भी असर नहीं हो रहा था। 

उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि उनकी बिगड़ती स्थिति को काबू में करने के लिए अंतिम स्थिति तक उनके इलाज में भी परिवर्तन किया गया। लेकिन उसका भी कुछ खास लाभ नहीं हुआ। 18 जून की सुबह से ही उनकी स्थिति गंभीर होने लगी। शाम होते-होते उनका ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर और बीपी तेजी से नीचे आने लगा। हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी की जंग जीतने के लिए वे अंत तक प्रयास करते रहे।
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प्रेम कहानी: परिवार ने छिपाया पर मिल्खा सिंह को सपने से हुआ आभास...'निम्मी' चली गई 

मिल्खा सिंह और निर्मल मिल्खा सिंह।
उड़न सिख मिल्खा सिंह का शुक्रवार रात पीजीआई चंडीगढ़ में निधन हो गया। पत्नी निर्मल कौर की मौत के पांच दिन बाद उड़न सिख इस दुनिया को अलविदा कह गए। शुक्रवार को जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो पीजीआई के डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना होगा लेकिन परिजनों ने मिल्खा सिंह को वेंटिलेटर पर रखने से मना कर दिया था। परिजनों को आभास हो गया था कि निर्मल मिल्खा सिंह के जाने के बाद वे ज्यादा दिन तक जी नहीं पाएंगे। वेंटिलेटर पर उनके जीवन को खींचना ठीक नहीं होगा। पत्नी के साथ उनका जबरदस्त बंधन था। दो दिन से वे अपनी पत्नी को बहुत याद कर रहे थे। मिल्खा सिंह और निर्मल कौर की मुलाकात साल 1955 में श्रीलंका के कोलंबो में हुई थी। मिल्खा सिंह को पहली नजर में निर्मल कौर से प्यार हो गया। हालांकि परिवार ने उन्हें निर्मल कौर की मौत के बारे में बताया नहीं था लेकिन दोनों के बीच ऐसा बंधन था कि मिल्खा सिंह को सपने से पत्नी की मौत के बारे में पता चल गया था। फ्लाइंग सिख के नाम से दुनिया भर मे मशहूर मिल्खा सिंह 19 मई को कोरोना संक्रमित मिले थे।
 
 
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पंजाब सरकार की मेहरबानी: तीन मिनट में दो विधायकों के बेटे बने अफसर, ये बनाया नौकरी देने का आधार 

पंजाब मंत्रिमंडल ने दो विधायकों के बेटों को अफसर बनाने के प्रस्ताव को तीन मिनट में मंजूरी दे दी। सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भतीजे और विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर (ग्रेड-2) और विधायक राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे को राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार नियुक्त किया गया। इस प्रस्ताव को विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बावजूद मंत्रिमंडल ने सिर्फ तीन मिनट में पारित कर दिया। 

मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को पारित करने के लिए अनुकंपा आधार पर नौकरी देने संबंधी नियमों में भी संशोधन किया, क्योंकि दोनों को अनुकंपा के आधार पर ही नौकरी दी गई है। इन दोनों के दादा पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा और जोगिंद्र पाल पांडे की पंजाब में आतंकवाद के समय आतंकवादियों ने हत्या की थी। दोनों की नियुक्ति को अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों संबंधी पॉलिसी, 2002 में एक बार छूट देकर विशेष केस के तौर पर माना गया है। हालांकि, इसे  प्रथा के तौर पर नहीं विचारा जाएगा। विपक्षी दलों-शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध भी किया। 


अपनी कुर्सी बचाने के लिए विधायकों के बच्चों को नौकरी दे रहे कैप्टन: सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों के बच्चों को नौकरी देने के फैसले को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में राज्य में शिअद-बसपा गठबंधन सरकार बनते ही ऐसी सभी अवैध नियुक्तियों को रद्द कर दिया जाएगा।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां गरीब और मेधावी छात्र नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं, कांग्रेस सरकार ने घर-घर नौकरी योजना को बदलकर केवल कांग्रेस घर नौकरी में बदल दिया है। पहले अनुकंपा के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते को डीएसपी नियुक्त किया गया था। अब कांग्रेसी विधायक फतेहजंग सिंह तथा राकेश पांडे को इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदार के पद पर झूठे अनुकंपा के आधार पर नई नौकरियां पैदा कर नियुक्त किया गया है। 

सुखबीर ने नियुक्तियों को अवैध बताते हुए कहा कि उनके दादाओं की कथित कुर्बानी के बदले विधायकों के बच्चों को नौकरियां नहीं दी जा सकती हैं। यह निंदनीय है कि मुख्यमंत्री ने पंजाब कांग्रेस पार्टी में चल रही तकरार में अपनी कुर्सी बचाने के उद्देश्य से ऐसा कर अधिनियम को झूठा आधार दिया है। मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि 1987 में पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा को गोली मारने पर केस दर्ज किया गया था। 

एफआईआर में कहा गया था कि सतनाम सिंह बाजवा को व्यक्तिगत मतभेद के आधार पर गोली मारी गई थी। इस मामले में कुर्बानी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, जिसके आधार पर बाजवा के पोते को उनके दादा की मौत के 33 साल बाद सरकारी नौकरी देकर पुरस्कृत किया जा रहा है।
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अनंत में लीन मिल्खा सिंह: कोरोना ने देश से छीना फ्लाइंग सिख, 91 साल की उम्र में चंडीगढ़ में ली आखिरी सांस

कोरोना संक्रमित होने के बाद करीब एक महीने से जूझ रहे पूर्व ओलंपियन पद्मश्री मिल्खा सिंह (91) का शुक्रवार देर रात पीजीआई चंडीगढ़ में निधन हो गया। फ्लाइंग सिख के नाम से दुनिया भर मे मशहूर मिल्खा सिंह 19 मई को कोरोना संक्रमित मिले थे। इसके बाद फोर्टिस मोहाली में भर्ती रहे। बाद में परिजनों के आग्रह पर अस्पताल में छुट्टी लेकर सेक्टर-8 स्थित आवास पर ही इलाज करा रहे थे। 

बीते तीन जून को हालत बिगड़ने पर उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया था। बीते बुधवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी लेकिन संक्रमण के कारण वह बेहद कमजोर हो गए थे। शुक्रवार दोपहर अचानक उनकी तबीयत गंभीर हो गई। बुखार के साथ उनका ऑक्सीजन स्तर नीचे गिरने लगा। पीजीआई के डॉक्टरों की सीनियर टीम उन पर नजर बनाए हुए थी, लेकिन देर रात उनकी हालत बिगड़ गई और रात 11.40 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ भारतीय खेल के एक युग का अंत हो गया। इस दुखद सूचना से देश और दुनिया के खेल प्रेमियों में शोक की लहर फैल गई। 

पांच दिन पहले हुई थी पत्नी की मौत
मिल्खा सिंह के साथ उनकी पत्नी निर्मल कौर भी कोरोना संक्रमित हो गईं थीं। हालत गंभीर होने पर उन्हें मोहाली के निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। उनकी भी हालत कई दिनों तक स्थिर बनी हुई थी, लेकिन 13 जून की शाम को उनका निधन हो गया। मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी के बीच काफी जुड़ाव था। 
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बल्ले बल्ले: पंजाब कैबिनेट ने मंजूर कीं छठे वेतन आयोग की सिफारिशें, एक जुलाई से बढ़ेगा वेतन 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें छठे वेतन आयोग की अधिकांश सिफारिशों को मंजूरी दे दी गई। ये सिफारिशें 1 जुलाई, 2021 से लागू कर दी जाएंगी। छठा वेतन आयोग 1 जनवरी, 2016 से प्रभावी माना जाएगा। इस फैसले से सूबे के 5.4 लाख सरकारी कर्मचारियों और सेवामुक्त कर्मचारियों को लाभ होगा। 

इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 6950 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 18000 रुपये प्रति माह करने को भी मंजूरी दी गई है। वेतन और पेंशन पिछले वेतन आयोग की सिफारिशों के मुकाबले इस बार 2.59 गुना बढ़ जाएंगे और सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत मिलेगा। इससे सभी मौजूदा कर्मचारियों के वेतनमान पड़ोसी राज्य हरियाणा से अधिक हो जाएंगे। 


मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि छठे वेतन आयोग के लागू होने से सुधारे हुए ढांचे के मुताबिक न्यूनतम पेंशन 3500 रुपये प्रति माह से बढ़कर 9000 रुपये प्रति माह हो जाएगी। न्यूनतम फैमिली पेंशन बढ़कर 9000 रुपये प्रति माह हो जाएगी। नए ढांचे के अंतर्गत तलाकशुदा व विधवा बेटी भी फैमिली पेंशन के योग्य होगी। फैमिली पेंशन के लिए आय का योग्यता पैमाना 3500 रुपये जमा डीए से बढ़ाकर 9000 रुपये जमा डीए प्रति माह कर दिया गया है।

 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक मूल बकाया की अनुमानित राशि करीब 13800 करोड़ रुपये बनती है। उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार 2017 से कर्मचारियों को 5 प्रतिशत अंतरिम राहत पहले ही दे रही है। साल 2016 के लिए कर्मचारियों और पेंशनरों के मूल बकाया की अनुमानित राशि 2572 करोड़ रुपये बनती है जो दो समान किश्तों में अक्तूबर 2021 और जनवरी 2022 में दी जाएगी। सरकार ने 1 जुलाई 2021 से पेंशन की कम्यूटेशन 40 प्रतिशत तक बहाल करने को भी मंजूरी दे दी है। 

डीसीआरजी और एक्स ग्रेशिया अनुदान होगा दोगुना
मौत अथवा रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (डीसीआरजी) को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा एक्स ग्रेशिया अनुदान की मौजूदा दरें दोगुना कर दीं गई हैं। मौत या रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और एक्सग्रेशिया को नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत आते कर्मचारियों को भी प्रदान करने का फ़ैसला किया गया है। 

खजाने पर पड़ेगा 8637 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने साथ राज्य के खजाने पर सालाना 8637 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और संभावी अतिरिक्त कुल खर्चा प्रति वर्ष करीब 4700 करोड़ रुपये होगा। गौरतलब है कि छठे वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट का पहला हिस्सा पंजाब सरकार को 30 अप्रैल, 2021 को सौंपा था, जिसमें मोटे तौर पर वेतनमान, भत्ते और पैंशन और सेवामुक्ति के लाभ संशोधन की सिफारिशें शामिल थीं। यह फ़ैसला किया गया कि नए भत्तों व संशोधित भत्तों को लागू करने की तारीख़ 1 जुलाई 2021 होगी। प्रतिशत आधारित भत्ते जैसे कि मकान किराया भत्ता (एचआरए), एनपीए आदि नये ढांचे के अनुसार तर्कसंगत किए जाएंगे। वहीं, डिजाइन भत्ता, चौकीदार और चालकों के लिए विशेष भत्ते को दोगुना कर दिया गया है। राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा भत्ता भी शुरू किया है। यह भत्ता एक मुश्त लाभ के रूप में अपनी नौकरी से संबंधित उच्च योग्यता हासिल करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। नए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के वेतनमानों के अनुसार ही अदायगी की जाएगी जोकि सभी नयी भर्ती पर भी लागू होगी।
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अब रिजिजू ने खाई कसम: मिल्खा सिंह का यह ख्वाब रह गया अधूरा, अंतिम समय तक कोई भारतीय नहीं कर सका पूरा

महान धावक मिल्खा सिंह का शुक्रवार को चंडीगढ़ में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत खेल, राजनीति और फिल्म जगत की तमाम हस्तियों ने उन्हें श्रद्धाजंलि दी। भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद धावक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले मिल्खा सिंह का एक ख्वाब अधूरा रह गया। वे दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन कोई भारतीय उनकी इच्छा को पूरा नहीं कर पाया। अब केंद्रीय खेल मंत्री किरन रिजिजू ने इसे पूरा कर दिखाने की कसम खाई है। 

मिल्खा सिंह ने अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में 77 दौड़ें जीतीं, लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी दौड़ में किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

खेल मंत्री बोले- वादा करता हूं, आपकी आखिरी इच्छा को पूरा करेंगे
किरन रिजिजू ने ट्विटर पर मिल्खा सिंह का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वादा करते हैं कि वह मिल्खा सिंह की आखिरी इच्छा को पूरा करेंगे। वीडियो में मिल्खा सिंह ये कहते हुए दिख रहे हैं कि उनकी आखिरी इच्छा है कि जैसे उन्होंने एथलेटिक्स में देश के लिए गोल्ड जीता, वैसे ही कोई देश का नौजवान दौड़ में देश के लिए रोम ओलंपिक में गोल्ड जीते और भारत का झंडा लहराए। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भारतीय फुटबाल टीम ने भी मिल्खा सिंह के निधन पर शोक जताया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने लिखा कि उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनकी जिंदगी अगली कई पीढ़ियों को प्रेरणा देगी।

मिल्खा सिंह का करिअर
1958 में भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा था
2001 में भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार देने की पेशकश की गई, जिसे मिल्खा सिंह ने ठुकरा दिया था

धावक के तौर पर करिअर
1956: मेलबोर्न में आयोजित ओलंपिक खेलों में 200 और 400 मीटर रेस में भारत का प्रतिनिधित्व किया
1958: कटक में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने 200 और 400 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया। 
एशियन खेलों में भी इन दोनों प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल किया। 
वर्ष 1958 में उन्हें एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली, जब उन्होंने ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों में 400 मीटर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस प्रकार वह राष्ट्रमंडल खेलों के व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले स्वतंत्र भारत के पहले धावक बन गए।

धावक के बाद का जीवन
सन 1958 के एशियाई खेलों में सफलता के बाद सेना ने मिल्खा को ‘जूनियर कमीशंड ऑफिसर’ के तौर पर पदोन्नति देकर सम्मानित किया गया और बाद में पंजाब सरकार ने उन्हें राज्य के शिक्षा विभाग में ‘खेल निदेशक’ के पद पर नियुक्त किया। इसी पद पर मिल्खा सन 1998 में सेवानिवृत्त हुए।
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